ओरछा: बुंदेलखंड के भाल पर जगमगाता हीरक तिलक । बुंदेलखंड के लोगों की जिजीवषा, बहादुरी के साथ कलाप्रेम की बानगी दिखाती जगह है ओरछा । बेतवा के तट पर स्थित प्राकृतिक सम्पदा और सुंंदरता से भरपूर स्थान । आप ओरछा पहुँचते ही सम्मोहन की अवस्था में आ जाते हैं । मुश्किल से 3-4 वर्ग किलोमीटर में फैली इस जगह का प्रत्येक दर्शनीय स्थान आपकी स्मृति में अंकित हो जाएगा । तो सबसे पहले यहाँ कैसे पहुंचा जाये, इसकी चर्चा कर लें । झांसी से ओरछा मात्र 16 किलोमीटर की दुरी पर पड़ता है और झाँसी जो की उत्तर प्रदेश का प्रमुख शहर है, रेल तथा सड़क मार्ग द्वारा पुरे भारत से बड़ी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है । विशेषकर रेल मार्ग से तो भारत के किसी भी हिस्से से झाँसी बड़ी आसानी और तेजी से पहुंचा जा सकता है । झाँसी भी ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ महारानी लक्ष्मी बाई के किले सहित कई दर्शनीय स्थल है, जिनकी चर्चा फिर किसी पोस्ट में । झांसी में अगर थोडा टाइम आपके पास है और उसका उपयोग करना चाहते हैंं तो फिर झॉंसी का किला देख आइये, आपको अच्छा लगेगा. झाँसी से ओरछा जाने के लिए ढेर साधन मौजूद हैं, बस, प्राइवेट टैक्सी, मिनी पब्लिक ट्रांसपोर्ट से लेकर ऑटो रिक्शा तक । इस रूट पर ट्रेन उपलब्ध नहीं है । झाँसी से निकलकर ओरछा जाने वाली सड़क तक पहुँचते ही चारों ओर फैली हरियाली आपकी यात्रा की थकान को दूर करना शुरू कर देगी ।
ओरछा में ठहरने के लिए आपके बजट के अनुसार ढेर सारे छाेटे बड़े होटल, गेस्ट हाउस इत्यादि उपलब्ध हैं । मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संचालित 'बेतवा रिट्रीट' के अलावा होटल शीश महल, होटल बुदेलखंड रिवरसाईड, ओरछा रिसोर्ट इत्यादि कुछ प्रमुख आरामदायक होटल्स हैं ।
ओरछा की सबसे प्रमुख जगह, जिसके कारण यहाँ का धार्मिक महत्व अयोध्या के समान है, वह है रामराजा मंदिर. और ओरछा के लोग तो हल्की सी मुस्कराहट के साथ इतराते हुए आपको यही कहेंगे की जबसे श्रीराम राजा सरकार अयोध्या से ओरछा पधारे हैं तबसे अयोध्या में बचा ही क्या है । श्रीरामजी के अयोध्या से ओरछा आने की कहानी आप ओरछावासियो से ही सुने तो आपको ज्यादा आनंद आएगा । रामराजा सरकार का विशाल मंदिर पुराने बस स्टैंड के सामने से ही दिखता है । विस्तृत बाहरी प्रांगण में प्रवेश करतेे ही भक्तों का हुजूम आपके सामने होगा । मंदिर के अंदर प्रवेश करने सेे पहले ध्यान रखें कि कोई चमड़े की वस्तु जैसे बेल्ट इत्यादि बाहर ही उतार दें । मंदिर के अंदर मुख्य गर्भगृह में राम दरबार की झॉंकी विराजमान है तथा चारों ओर अन्य देवी देवताओंं की चौकियॉं स्थित हैं । श्रीराम राजा सरकार की एक झलक पाने के लिए व्याकुल भक्तजन मुख्य गर्भगृह के बाहर प्यासी नजरों के साथ करबद्ध खड़े आपको दिख जाएंगे । भक्तों के हृदय से सहज ही स्वर लहरी फूट पड़ती है : 'श्री रामचंद्र कृपालु भज मन, हरहु भव भय दारूणम्' । आपकी धर्म में रूचि हो या न हो लेकिन ऐसे पवित्र स्थान पर जाकर स्वत: ही अंतरतम में प्रशांति छाने लगती है । यहॉं पर किसी प्रकार की जल्दबाजी न करते हुए गहराई और सूक्ष्मता से निहारने पर आपको भक्ति, समर्पण, आध्यात्म और प्रेम के कई रंग दिखने लगते हैं । जैसा कि नाम से जाहिर है रामराजा सरकार मंदिर में श्रीरामजी की पूजा एक राजा केे तौर पर की जाती है तथा एक राजा की ही तरह उन्हें सुबह-शाम गारद द्वारा सशस्त्र सलामी दी जाती है ।

 |
| रामराजा सरकार मंदिर |
मंदिर के बाहर निकलते ही बायीं ओर नजरें घुमाने पर आपको दो ऊँचे खंबे दिखाई देंगे । ये खंबे ओरछा के महाराजाओं द्वारा गर्मी के दिनों में सर्दी के अहसास के लिए बनवाए गए कूलिंग सिस्टम का एक अंग है । पर्सियन शैली में बनाया गया यह कूलिंग सिस्टम शायद भारत में केवल ओरछा में ही है, ऐसा जानकारों का मानना है । इन खंबों का नाम भारतीय कैलेण्डर में बारिश के मौसम केे महीनों के नाम पर 'सावन-भादों' रखा गया है । ओरछा जाने पर इस सिस्टम को भी जरूर देखकर आयें । यहीं पर एक विशाल उद्यान है, जहॉं लालाा हरदौल की समाधि स्थित है । बुंदेलखंड में आज भी विवाह के समय पहला आमंत्रण लालाा हरदौल को दिया जाता है । लाला हरदौल की पीढि़यों से चली आ रही जनश्रुति, जिसमें रिश्तों के विश्वास के लिए बलिदान की महिमा है, फिर कभी आपके सामने लेकर आएंगे ।
 |
| सावन-भादों खंबे |
अभी ओरछा में जानने-सुनने-देखने के लिए बहुत कुछ बाकि बचा है, जिसके लिए जल्दी ही ओरछा-2 प्रकाशित करने की कोशिश करूँगा ।